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Best Motivational Poem in hindi on Success

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Life Changing Best motivational poem in hindi on Success

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Best Motivational Poem in hindi on Success

आरंभ है प्रचंड…….

आरंभ है प्रचंड,बोले मस्तकों के झुंड
आज ज़ंग की घड़ी की तुम गुहार दो|
 आन, बान, शान या कि जान का हो दान,
आज इक धनुष के बाण पे उतार दो|
                                              मन करे सो प्राण दे जो,मन करे सो प्राण ले,
                                             वही तो है सर्वशक्तिमान है|
                                             ईश की पुकार है,ये भागवत का सार है,
                                            कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है|
कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का नीड़ हो ,
जो लड़ सका है वो ही तो महान है|
                                                  जीत की हवस किसी पे कोई वश नहीं है
                                                 क्या जिंदगी है ठोकरों पे मार दो |
                                                 मौत अंत है नहीं तो मौत से भी क्यों डरें ,
                                                 ये जा के आसमान में दहाड़ दो।
हो दया का भाव या कि शौर्य का चुनाव,
या के हार का वो घाव तुम ये सोच लो|
या के पूरे भाल पर जला रहे विजय का लाल,
लाल ये गुलाल तुम ये सोच लो  |
                                                  रंग केसरी हो या मृदंग केसरी हो,
                                                  या कि केसरी हो लाल तुम यह सोच लो|
जिस कवि की कल्पना में ज़िंदगी हो प्रेम गीत,
उस कवि को आज तुम नकार दो |
भिंगती नसों में आज फूलती रगों में आज,
आग की लपट का तुम बघार दो|

 

                                               आरंभ है प्रचंड…….

Motivational Poem in hindi on Success

वरदान माँगूँगा नहीं….

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

स्मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो मैं विश्व की संपत्ति चाहूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

 

क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

 

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम हो महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं व्यर्थ त्यागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

 

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्य पथ से किंतु भागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

                                                       -शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

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