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Magnetic Force definition in Hindi | चुंबकीय बल

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चुंबकीय बल (Magnetic Force)

“किसी एक चुंबक (Magnet) के द्वारा दूसरे चुंबक पर या चुंबकीय पदार्थ (Magnetic Material) पर लगाया गया आकर्षण या प्रतिकर्षण बल (Attractive or Repulsive Force) , चुंबकीय बल (Magnetic Force)कहलाता है |”

चित्र अ

(चित्र अ में ) जब किसी चुंबक को लौह चूर्ण (Iron Powder) के बीच में रखा जाता है , तो लौह चूर्ण चुंबक पर आकर्षित हो जाते हैं |

  • लौह चूर्ण का यहां आकर्षण चुंबकीय बल (Magnetic Force) तथा चुंबकीय बल की दिशा को प्रदर्शित करता है |
  • इसका SI मात्रक (SI Unite) न्यूटन होता है |
  • प्रत्येक स्थान पर चुंबकीय बल (चित्र ब में ) एक निश्चित दिशा में  कार्य करता है|
  • इस बल की  दिशा को चुंबकीय बल रेखाओं के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।

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किसी बिन्दू पर इन बल रेखाओं की दिशा चित्र से स्पष्ट हो रही है कि यह उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं और चुंबक के बाहरी क्षेत्र से होते हुए चुंबक के दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश कर जाती हैं और फिर यह चुंबकीय बल रेखाएं चुंबक के अंदर से होते हुए दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव पर पहुंचती हैं |

  • इस प्रकार से यह बल रेखाएं बंद पाश का निर्माण करती हैं |

Magnetic Force Formula –

दूसरी तरह से यदि चुंबकीय बल (Magnetic Force) को समझे तो-

“वह आकर्षण या प्रतिकर्षण बल जोकि विद्युतीय रूप से आवेशित कणों के बीच उनके गति के कारण कार्य करता है, चुंबकीय बल  (Magnetic Force) कहलाता है|”

  • जब कई आवेश विराम अवस्था में होते हैं तो इन आवेशों के बीच में केवल विद्युत बल कार्य करता है|
  • जब यह आवेश गति अवस्था में आ जाते हैं तो इन आवेशों के बीच विद्युत बल के साथ-साथ चुंबकीय बल भी कार्य करने लगता है|
  • यह चुंबकीय बल गति करते हुए आवेशों के बीच आवेशों द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव के कारण होता है|

मान लीजिए कि दो पिंड A और B हैं जिन पर आवेश क्रमशः q1 और q2 है| यदि यह दोनों आवेश v1 और v2 वेग से गति करते हैं तो इन दोनों के द्वारा चुंबकीय क्षेत्र क्रमशः B1 और B2 उत्पन्न किया जाएगा|
तो पिंड B पर पिंड A द्वारा कार्य करने वाला चुंबकीय बल होगा-

                                    F = q2B1v2 sin θ

– जहां  θ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और पिंड B की दिशा के बीच का कोण है|

  • इस “चुंबकीय बल  (Magnetic Force)” का मान अधिकतम होगा-

जब चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और पिंड B के गति की दिशा के बीच 90 डिग्री का कोण बनता है|

  • इस चुंबकीय बल का मान न्यूनतम होगा-

जब पिंड B गति नहीं करेगा अर्थात उसका वेग शून्य होगा|

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